शुक्रवार, जनवरी 16

2025 में भारत द्वारा आयोजित/संबंधित शिखर सम्मेलन

"भारत द्वारा आयोजित/संबंधित शिखर सम्मेलन"। इसे तीन अलग-अलग पंक्तियों वाली एक प्रोफेशनल टेबल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनमें से प्रत्येक एक प्रमुख वैश्विक कार्यक्रम का प्रतिनिधित्व करती है:
क्वाड शिखर सम्मेलन 2025:
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) सभा 2025:
रायसीना डायलॉग 2025:

2025 में भारत एक वैश्विक राजनयिक केंद्र के रूप में उभरा

2025 में भारत ने वैश्विक शासन और रणनीतिक संवाद के एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया, और दुनिया के तीन सबसे प्रभावशाली शिखर सम्मेलनों की मेजबानी की। इन बैठकों ने समुद्री सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में भारत के नेतृत्व को रेखांकित किया।
1. इंडो-पैसिफिक को मजबूत करना: क्वाड शिखर सम्मेलन
2025 में, भारत ने चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (क्वाड) नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। ऑस्ट्रेलिया, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के राष्ट्राध्यक्षों को एक साथ लाकर, शिखर सम्मेलन ने "एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक" को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया। मुख्य चर्चाएँ समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं और "भविष्य के बंदरगाह" साझेदारी के इर्द-गिर्द घूमती रहीं, जिसे मुंबई में आयोजित विशेष सम्मेलनों के दौरान औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया था।
2. हरित परिवर्तन का नेतृत्व: 8वीं ISA सभा
अक्टूबर 2025 के अंत में, 8वीं अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) सभा भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उद्घाटन की गई इस सभा में 124 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका ध्यान विकासशील देशों में सौर ऊर्जा को अपनाने में तेजी लाने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए "वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड" (OSOWOG) पहल को आगे बढ़ाने पर था।
3. भू-राजनीतिक संवाद: 10वां रायसीना डायलॉग
मार्च में आयोजित रायसीना डायलॉग 2025 ने भू-राजनीति पर भारत के प्रमुख सम्मेलन की दसवीं वर्षगांठ मनाई। "समय चक्र: लोग, शांति और ग्रह" विषय के तहत, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधान मंत्री क्रिस्टोफर लक्सन (मुख्य अतिथि) ने आधुनिक राजनीति की "बदलती गतिशीलता" को समझने के लिए वैश्विक नेताओं को संबोधित किया। यह संवाद 3,500 से अधिक प्रतिभागियों के लिए AI नैतिकता, व्यापार और वैश्विक सुरक्षा पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। रणनीतिक प्रभाव:
इन इवेंट्स को होस्ट करके, भारत ने ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच की खाई को सफलतापूर्वक पाट दिया है, और खुद को न केवल एक पार्टनर के रूप में, बल्कि नई अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के एक प्रमुख आर्किटेक्ट के रूप में भी स्थापित किया है।

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